MY DEAR FRIENDS, A LATTER FROM "ANANDI-BALIKA BADHU" TO YOU. PL.DOWNLOAD RING TONE-- "छोटीसी उंमरमें परणायी रे बाबुसा|" R.T.- http://www.zshare. To download 6.0 minitues FULL SONG PL.VISIT- MARKAND DAVE. mdave42@gmail. "बालिका बधु |" मैं आनंदी| आपकी आनंदी | पहेंचाना? नहीं पहेंचाना? मैं आनंदी-जग्याकी बिंदणी | आपको क्या बताऊं?आजकल मैं बहुत दुःखी हुं | मैंने ऐसा क्या कीया है? मेरा गुनाह क्या है? सबकुछ ठीक चल रहा था| ना जाने कहॉसे आकर वह बूरे महावीर अंकल ने मेरे बापूकी ज़मीन छीन ली | मैं मा-बापूका दुःख देख़ ना सकी और जग्या मेरा दुःख देख़ ना सका | वह बूरे अंकलके पास जग्या मुझे लेकर गया था,मैं अकेली तो उनके घर कभीना जाऊं | फीरभी दादीसाने मुझे बहुत डांटा,और मुझे घरसे भी नीकाल दिया | क्या मेरा बिंद मेरे लीये इतना भी नहीं कर सकता?वहीतो मुझे वह बूरे अंकल की हवेली पर ले गया था | उन्होंने भी,बापूको ज़मीन वापस करनेका वाईदा कीया था,फीर ना जाने क्यूं उन्होंने म्हारी सासरीमें आकर दादीसा को सबकुछ बता दीया और दादीसा मेरे उपर गुस्सा हो गई | मैंने सुना था,ऐसे ही एक अच्छे सांसद अंकल ने,छोटी उम्रमें शादीको लेकर,हमारे देशकी संसदमें मेरे लीये हंगामा ख़डा कर दीया था | अब ना जाने क्या हुआ,वह चूप हो गये हैं | मूझे इतनी छोटीसी उम्रमें सासरी से नीकाल दीया हैं,तबभी संसदमें कोईभी आवाज़ नहीं उठा रहा | वह अंकल भी नहीं | क्या उनकी संवेदना अब ख़त्म हो गई हैं? दादीसा का ऐसा वर्ताव आप सबको पसंद ना आया होगा,मैं जानती हुं, मगर आप सब चूप क्यूं हैं? वैसे तो सासरीमें मुझे हमेशां मां-बापूकी बहुत याद आती थी और बारबार उनके पास रहेनेको बहुत मन करता था | मगर मैं मां-बापूके पास ईस तरह थोडे ही रहेना चाहती थी ! मुझे सासरीसे नीकाल दीया है,अब मैं क्या करुं?जीनके मां-बापू नहीं होते वह कहां जाते होंगे? क्या ग़रीब होना गुनाह हैं? आप सब दादीसा और मेरी सासुमांको बोलो ना,की जग्याको मेरे पास भेंज दें |वह वैसे भी बूरे दोस्तोंके साथ बीड़ी पीता है, ज़ूठभी बोलता है और ठीकसे पढ़ाईभी नही करता | मैं और जग्या यहां स्कूलमें एकसाथ पढ़ेंगे मुझे उसके बीना बिलकुलभी अच्छा नहीं लगता | अगर सुग्नादीदीका बिंद शामभाई सासरीमें रेह सकता है तो मेरा बिंद जग्या भी यहां मेरे मां-बापूके पास रहेगा |मेरे मां-बापूके लीये जग्या भी,बेटे जैसा ही है ना? आप सबसे मेरी बिनती हैं,कैसेभी करके आप,वह संसदवाले अच्छे अंकलको या फीर दादीसाको इतना बतादें की मुझे और दुःखी होने से बचालें | मैं बहुत सारा पढ़ना-लीख़ना चाहती हुं | मैं बड़ी होकर नौकरी करके मेरे मां-बापू,जग्या और मेरी सासरीमें सबको सुखी देख़ना चाहती हुं |दादीसा और बाकी सब मेरे साथ ऐसा क्युं करते हैं?मेरी सासरीमें मेरे लीये अगर जगह नही हैं तब बड़ी होकर इस देशमें मेरा स्थान कहां होगा?मैं कुछ ज्यादा कहे गई हो तो मुझे माफ़ करना,मगर घूंट-घूंटके जीना या मेरे गांवके कूऍ-तालाबमें मरना ही मेरे भाग्यमें लीख़ा हैं क्या? आपकी मददकी चिंतातुर, अभागी आनंदी |
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