`I` से बड़ा `WE?` (सौजन्य-गूगल) http://mktvfilms.blogspot.com/2011/05/i-we.html " हमको सब ढूंढेंगे, हमारे जाने के बाद, =========== प्यारे दोस्तों, एक बार, एक शिक्षा-संस्थान के प्रांगण में, I, YOU, और WE, आमने-सामने आकर ज़िद पर आ गए कि,"संस्था में किसका स्थान ज्यादा महत्वपूर्ण है और सफलता का मीठा-पक्का फल किसे मिलना चाहिए?" ============ "अबे, `हुंकार-I` ये तु क्या कर रहा है..रे ?" "अरे..!! चुप करना `सर्वकार-We`, फ़ालतू, बीच में बोलता रहता है..!! मैं ने तुझे बुलाया क्या?" "नहीं..!!" " तो फिर, क्यूँ अत्यधिक बुद्धिमानी दिखा रहा है? चल हट, हवा आने दे और काम कर अपना..!!" " पर यार, इस प्रकार? `तुंकार-You` के कंधे पर चढ़कर, खड़े रह कर? इतना ऊँचा? क्या,कर क्या रहे हो, तुम दोनों?" " देख `तुंकार-You`, हम दोनों यहाँ क्या कर हैं, ये बात `सर्वकार-We` को मत बता देना..!!" " हमें सब पता है,`हुंकार-I` और `तुंकार-You`,तुम दोनों क्या कर रहे हो..!!" " `सर्वकार-We`, प्लीज़, आप लोग थोड़ा दूर जाकर खड़े रहेंगे? अब और एक शब्द भी बोले तो,ठीक न होगा..!!" ========= (इतने में, `हुंकार-I`,के धड़ाम से गिरने की आवाज़..!!) "अबे..या..आ..र, `तुंकार-You`, ये तुमने क्या किया, आखिर मुझे गिरा ही दिया ना? मैं ,`Success`, फल के कितना करीब पहुँच गया था..!! कर दिया ना बेड़ा गर्क? ( `हुंकार-I` के एक बार बुलाने भर ही, `सर्वकार-We` उसकी मदद के लिए दौड़ते चले आयें और उसे ज़मीन पर से हाथ पकड़ कर `हुंकार-I` को खड़ा होने में, सहायता कि, इतना ही नहीं, उसकी `हुंकार - I Am PhD.` , `EGO-अहंवाद` विषय के, यूनिवर्सिटी द्वारा पहनाये गये, युनिफ़ॉर्म पर लगी हुई मिट्टी को भी साफ करने लगे..!!) " दोस्त,`हुंकार-I` तुमको ज़मीन दोस्त हुआ देख, मेरी ` jealousy` की खुजली अपने आप मिट गई..!! ही..ही..ही..ही..!!" " `सर्वकार-We`, मेरी सहायता के लिए-Thanks दोस्तों । चलो अब देखते क्या हो..!! `Success` के मीठे-पक्के फल, ना तो अकेले मैं `हुंकार-I`,ना तो अकेले `तुंकार-YOU`,पर `हुंकार-I + तुंकार-YOU = सर्वकार-We` बनकर, एक होकर, एक दूसरे की सहायता से, एक साथ चखेंगे..!! ========= आधुनिक बोध- शरारती,इर्ष्यालु,`तुंकार-YOU` की सहायता से, अकेला `हुंकार-I` , अहंकार भाव धारण करके, जब-जब,`Success` नाम का मीठा-पक्का फल, अकेले ही, खाने का स्वार्थी प्रयत्न करता है, तब-तब उसे अनपढ़-गवाँर माने गए, `सर्वकार-We` नाम के मेहनतकश इन्सानों की हमेशा ज़रूरत महसूस होती ही है । ========= प्यारे दोस्तों, इस बोध को, आप कोई भी व्यक्ति,परिवार,कंपनी, संस्था या सत्ता मंडल पर लागू करके देख लें, सभी जगह ये सटीक लागू होता दिख रहा है क्या? मार्कण्ड दवे । दिनांक- ०५-०५-२०११. |
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[Gujarati Club] आधुनिक बोधकथा-५- `I` से बड़ा `WE?`
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