[Gujarati Club] Re: Markand bhai :

 

tfs,... too gud. thx.

--- In gujaraticlub@yahoogroups.com, Markand Dave <davemarkand@...> wrote:
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> `राशनकार्ड`- मुक्त छंद कविता ।
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> (courtesy-Google images)
>  
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> http://www.youtube.com/watch?v=YJ-MVnUP8J4&feature=youtu.be
> http://mkringtones.blogspot.in/2013/03/blog-post.html
> http://mktvfilms.blogspot.in/2013/03/blog-post_20.html
> न जाने बाबू ने राशन कार्ड से, मेरा  नाम  कैसे  मिटा दिया..!!
>  
> भूखा  था  कल  तक आज भी,पापी पेट को, मैंने समझा दिया ।
>
>
> देता रहा रिश्वत,निवाला छिन,बच्चों  के मुँह से, भीखमंगों को, 
>  
> कहाँ से मिल गया,हाज़मा भारी,रिश्वत देकर, दरिंदे नंगों को ।
>
>
> निगल  गया  हूँ न जाने कितने,ही कंकर - सड़े गेहूँ के साथ,
>  
> हज़म कर भी पाऊँगा,या लगेंगे न जाने मुझे à¤"र कितने साल?
>
>
> सौ जन्म भी होंगे कम,ढूंढ पाऊँ जो,खुद  को, इन टूटे आईनों में, 
>  
> बहते आंसु, आहें, बुझी निगाँहें, ताउम्र कटी, इन लंबी लाईनों में ।
>
>
> छाया है अंधेरा,बिना तेल मिट्टी के,झोंपड़ी à¤"र मेरे  ख़्वाब में भी,
>  
> आखिरी बार हो दर्ज,नाम राशन में, हो जाए रोशन चिता मेरी? 
>
>
> न जाने बाबू ने राशन कार्ड से, मेरा  नाम कैसे मिटा दिया..!!
>  
> भूखा था कल तक आज भी, पापी पेट को, मैंने समझा दिया ।
>  
> मार्कण्ड दवे । दिनांक - ०५ -०४ -२०११.
>

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